शिलाजीत के फायदे: विज्ञान असल में क्या कहता है
किसी भी केमिस्ट की दुकान पर जाइए या पाँच मिनट Instagram स्क्रॉल कीजिए — शिलाजीत हर समस्या के इलाज के तौर पर बिकता दिखेगा: एनर्जी, स्टैमिना, टेस्टोस्टेरोन, बाल, मूड। सच्चाई इससे कहीं ज़्यादा साधारण है — और ज़्यादा काम की भी।
इस गाइड में जानिए शिलाजीत क्या है, प्रकाशित रिसर्च ने असल में क्या पाया, क्या साबित नहीं हुआ है, और अगर आप इसे आज़माना चाहें तो सुरक्षित प्रोडक्ट कैसे चुनें।
शिलाजीत क्या है?
शिलाजीत हिमालय की चट्टानों से रिसने वाला एक चिपचिपा, तारकोल जैसा पदार्थ है, जो सदियों में सड़े-गले पौधों से बनता है। इसका मुख्य सक्रिय तत्व फुल्विक एसिड है, साथ में दर्जनों ट्रेस मिनरल्स।
आयुर्वेद में यह पीढ़ियों से रसायन (शरीर को फिर से ताकत देने वाला) माना गया है। आधुनिक रिसर्च नई और छोटे पैमाने की है — गिनती के ह्यूमन ट्रायल, ज़्यादातर में 100 से कम प्रतिभागी।
रिसर्च के मुताबिक यह किसमें मदद कर सकता है
टेस्टोस्टेरोन। 45-55 साल के पुरुषों पर हुई एक चर्चित 90-दिन की स्टडी में 250 mg शुद्ध शिलाजीत दिन में दो बार लेने से प्लेसीबो की तुलना में टोटल टेस्टोस्टेरोन में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण बढ़त मिली। यह एक छोटी स्टडी है — उत्साहजनक, लेकिन निर्णायक नहीं। अगर आपमें सच में कम टेस्टोस्टेरोन के लक्षण हैं (लगातार थकान, कम इच्छा, मांसपेशियों में कमी), तो खुद इलाज करने की बजाय ब्लड टेस्ट कराइए और डॉक्टर से बात कीजिए।
थकान और रिकवरी। छोटी स्टडीज़ बताती हैं कि शिलाजीत माइटोकॉन्ड्रिया (कोशिकाओं के पावरहाउस) के काम में मदद कर सकता है — "एनर्जी" वाले दावों की वैज्ञानिक जड़ यही है। जहाँ असर मिला, वहाँ भी मामूली था।
यह क्या नहीं करता
पुरुषों की सेहत में सीमाओं के बारे में ईमानदारी सबसे ज़रूरी है:
- यह इरेक्शन की दिक्कत या शीघ्रपतन का इलाज नहीं है। कोई भी सप्लीमेंट नहीं है। इनके मेडिकल कारण होते हैं जिन्हें डॉक्टर ही ठीक से समझ सकता है — और आजकल कंसल्टेशन बिल्कुल प्राइवेट और बिना झिझक के होता है।
- यह आपकी बॉडी नहीं बदल देगा। कोई सप्लीमेंट ट्रेनिंग, प्रोटीन और नींद की जगह नहीं ले सकता।
- यह "देसी वियाग्रा" नहीं है। जो इसे ऐसे बेच रहा है, वह भारतीय विज्ञापन कानून तोड़ रहा है — उसे अपने पैसे मत दीजिए।
सुरक्षित प्रोडक्ट कैसे चुनें
- सिर्फ शुद्ध (purified) रेज़िन या कैप्सूल। कच्चे शिलाजीत में सीसा, आर्सेनिक और पारा हो सकता है।
- थर्ड-पार्टी लैब टेस्टिंग। भरोसेमंद ब्रांड हेवी-मेटल और शुद्धता सर्टिफिकेट प्रकाशित करते हैं। सर्टिफिकेट नहीं, तो खरीदारी नहीं।
- सही मात्रा। रिसर्च में रोज़ाना 250-500 mg शुद्ध एक्सट्रैक्ट इस्तेमाल हुआ। ज़्यादा लेना बेहतर नहीं है।
- इंटरैक्शन जाँचें। गाउट या आयरन-ओवरलोड की स्थिति में न लें, और डायबिटीज़ या ब्लड-प्रेशर की दवा चलती हो तो डॉक्टर से पूछकर ही लें।
निचोड़
शिलाजीत एक ठीक-ठाक, आम तौर पर सुरक्षित सप्लीमेंट है — टेस्टोस्टेरोन और थकान पर मामूली प्रमाण के साथ, और उससे कहीं बड़े मार्केटिंग दावों के साथ। पहले नींद, ट्रेनिंग और खाना ठीक कीजिए; ये किसी भी सप्लीमेंट से बेहतर काम करते हैं। फिर भी शिलाजीत लेना चाहें, तो शुद्ध और टेस्टेड खरीदिए, 8-12 हफ्ते दीजिए, और असर खुद महसूस करके तय कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- शिलाजीत का असर कितने दिनों में दिखता है?
- जिन स्टडीज़ में फायदा मिला, उनमें रोज़ाना 8-12 हफ्ते तक सेवन किया गया था। कुछ दिनों में असर का वादा मार्केटिंग है, विज्ञान नहीं। तीन महीने में कोई फर्क न दिखे तो शायद यह आपके लिए कुछ खास नहीं कर रहा।
- क्या शिलाजीत रोज़ खा सकते हैं?
- ज़्यादातर स्टडीज़ में शुद्ध (purified) शिलाजीत 300-500 mg रोज़ाना सुरक्षित पाया गया। कच्चे शिलाजीत में हेवी मेटल्स हो सकते हैं — सिर्फ थर्ड-पार्टी लैब टेस्टिंग वाले ब्रांड लें, और कोई दवा चलती हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।
- क्या शिलाजीत से बिस्तर में स्टैमिना बढ़ता है?
- सीधे यौन प्रदर्शन पर कोई मज़बूत प्रमाण नहीं है। कुछ स्टडीज़ टेस्टोस्टेरोन और थकान में मामूली सुधार दिखाती हैं, जिसका असर एनर्जी पर पड़ सकता है। अगर परफॉर्मेंस की चिंता बनी रहती है, तो पहला सही कदम डॉक्टर है, सप्लीमेंट नहीं।
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